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Thursday, 25 August 2016

UP Police Inspector Court Case News SI Decision

A very Bad news is now coming for the applicant of Uttar pradesh police Inspector vacancy. High court of Allahabad now rejects the list of selected candidates in UP SI recruitment 2011.  Just like other vacancy of Up, Uttar pradesh police Sub Inspector recruitment Case was pending In high Court since 5 years. UP police recruitment and promotion board UPPRPB published the notification for the recruitment of Daroga bharti in 2011. Final results of Daroga bharti was published on June 2015. Total 4010 candidates were declared qualified UP SI vacancy.  These qualified candidates currently doing Up police up Nirikshak Training.  Candidates are now shocked that HC Allahabad cancel the results of UP police SI, platoon command vacancy. Court now ordered to State government UP that selection process will be preceded on the basis of written examination results. Now government will prepare new selection list / chayan Suchi for Daroga bharti.  However it’s expected that government will file appeal in Supreme Court regarding decision of HC.
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On the basis of written examination now UP PRPB will publish new selection merit list results. Ucch nyayalaya kept this decision on 26 may after the final hearing on this case.  After that court has passed their judgment on 24 august 2016. Upjob.in will also upload case decision PDF copy here.  Advocate of defending party and applicant said maximum no of applicant now doing their training and their training will be completed very soon.
Previous BSP government published the advisement for filling 4010 posts of SI and platoon commander. After that written examination was completed in 2014.  Results were published on 26 June 2015. After the declaration of the final results, disqualified candidates file writ petition against this results and challenge this selection in court.  Applicant said government misused that reservation policy and did wrong selection via using horizontal selection.  previously 100 marks was required for qualify the preliminary examination but many of the candidates whose marks was less than 100 was also got the chance for appearing in this examination . Rules are saying that government may call 3 time of proposed no for vacancy in successive stages but government invited 6 times of proposed no of vacancy.  Government also not recorded video of GD. That’s why they filed the case in HC.
News Updates in hindi
शुरू से ही लटकती रही अदालत की तलवार
=मई 2011 में बसपा सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई प्रक्रिया
11 दिसंबर 2011 को प्रारम्भिक लिखित परीक्षा
दारोगा भर्ती-2011
फैसले का अध्ययन
सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन करने के बाद आगे की विधिक कार्यवाही की जाएगी।
हरिशंकर मिश्र, इलाहाबाद
उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक व प्लाटून कमांडर भर्ती-2011 शुरू से ही विवादों में उलझती रही और इसका मुख्य कारण नियमों की अनदेखी, मनमाने फैसले और तमाम अनियमितताएं रहीं। इसकी वजह से कई बार अदालत में सरकार की किरकिरी हुई। किसी तरह अंतिम परिणाम घोषित हुआ लेकिन इसके बाद भी तमाम आरोप लगते रहे। अंतत: हाईकोर्ट ने इस चयन सूची को रद ही कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है जबकि चयनित दारोगा ट्रेनिंग कर रहे हैं। उनके लिए हाईकोर्ट का यह फैसला किसी सदमे से कम नहीं है।
पुलिस उपनिरीक्षक व प्लाटून कमांडर के 4010 की शुरुआत मई-2011 में बसपा कार्यकाल में हुई थी। उसी शासनकाल में इसकी प्रारंभिक लिखित परीक्षा के अनुदेश जारी हुए थे जिसमें हर विषय में चालीस फीसद और कुल पचास फीसद अंक अनिवार्य किए गए थे। इसका परिणाम सपा के सत्ता में आने के बाद एक जनवरी, 2013 को घोषित किया गया और इसके बाद से ही विवादों की शुरुआत भी हो गई।
खेल शुरू होने के बाद बदले गए नियम : इस भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा में 18 फरवरी, 2013 को दौड़ लगाते समय एक अभ्यर्थी की मौत हो गई। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई। बाद में राज्य सरकार ने नियम बदलते हुए शारीरिक दक्षता परीक्षा में संशोधन कर दस किमी की दौड़ को 4.8 किमी कर दिया। महिलाओं की दौड़ भी कम की गई। इस पर कोर्ट का फैसला आया कि ‘खेल शुरू हो जाने केबाद नियम नहीं बदले जा सकते।’ आखिर सितंबर 2014 में मुख्य लिखित परीक्षा हुई।
वाइटनर और ब्लेड का प्रयोग : तब तक कई याचिकाएं इस परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर दाखिल हो चुकी थीं।
यह तथ्य भी सामने आया कि मुख्य लिखित परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं में वाइटनर के प्रयोग के बावजूद 3038 अभ्यर्थियों की कापियां जांच दी गईं। इस मुद्दे पर पुलिस भर्ती बोर्ड हाईकोर्ट में बुरी तरह घिर गया। अभ्यर्थियों का सीधा आरोप था कि ऐसा सुनियोजित ढंग से किया गया है। कोर्ट ने आदेश किया कि वाइटनर और ब्लेड का प्रयोग करने वालों को बाहर किया जाए। रिजल्ट रद कर दिया गया। बोर्ड ने नए सिरे से रिजल्ट तैयार किया।
आरोपों की श्रृंखला में ही एक आरोप आरक्षण के नियमों का अवहेलना का था। अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल की कि क्षैतिज आरक्षण का उल्लंघन किया गया। याचिकाओं में कहा गया कि विशेष वर्ग के अभ्यर्थियों को सिर्फ समान्य कोटे में ही आरक्षण दिया गया है। इससे पहले सरकार ने अपने परिणाम के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण पर भेज दिया। अंतत: यही आरोप उसके लिए भारी साबित हुआ।
UP Police Inspector Court Case News SI Decision

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